लाल सागर में खूनी संघर्ष बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में फिर भड़का संकट

लाल सागर में खूनी संघर्ष बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में फिर भड़का संकट

समुद्र की लहरों के बीच एक और मालवाहक जहाज को निशाना बनाया गया है। यमन के तट के पास सुलगती आग ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रीढ़ तोड़ दी है। इस बार खतरा सिर्फ सामानों की आवाजाही तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इंसानी जिंदगियों पर सीधा प्रहार हुआ है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के ताजा मिसाइल हमले में तीन नाविकों की जान चली गई है। इस घटना ने दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक को लेकर नई और गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

क्यों सुलग रहा है बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य

लाल सागर और अदन की खाड़ी को आपस में जोड़ने वाला यह संकरा रास्ता वैश्विक अर्थव्यवस्था का मुख्य द्वार है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से ऊर्जा और सामान की सप्लाई पर निर्भर है। जब भी इस इलाके में तनाव बढ़ता है, सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ता है।

हालिया हमला तंजानिया के झंडे वाले एक डेक कार्गो जहाज पर हुआ। यमनी तटरक्षक बलों और सैन्य अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस भीषण हमले की चपेट में आने से जहाज पर सवार तीन क्रू मेंबर्स की मौके पर ही मौत हो गई। मारे जाने वालों में दो पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक शामिल है। इस खूनी संघर्ष ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि समंदर के रास्ते सफर करना कितना खतरनाक हो चुका है।

वैश्विक व्यापार पर मंडराता नया खतरा

जब जहाज पानी के बीचों-बीच सुरक्षित सफर तय कर रहे होते हैं, तब अचानक होने वाले ऐसे मिसाइल हमले पूरी सप्लाई चेन को हिला देते हैं। पिछले कुछ महीनों से मध्य पूर्व के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से लेकर लाल सागर तक तनाव चरम पर है।

कंपनियां और शिपिंग एजेंसियां अब इस रास्ते से गुजरने में कतराने लगी हैं। यदि नाविकों की सुरक्षा इसी तरह खतरे में पड़ती रही, तो जहाजों को अफ्रीका के सुदूर दक्षिणी छोर यानी केप ऑफ गुड होप का लंबा चक्कर काटने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इससे न केवल ईंधन का खर्च बढ़ेगा, बल्कि हर रोज इस्तेमाल होने वाली चीजों से लेकर कच्चे तेल तक की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।

सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंताएं

समुद्री सुरक्षा से जुड़ी संस्थाएं लगातार चेतावनी जारी कर रही हैं। जहाजों पर आधुनिक हथियारों और मिसाइलों से हो रहे ये हमले किसी बड़े युद्ध के मैदान जैसे हालात पैदा कर रहे हैं। सुरक्षा जानकारों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में तुरंत कोई कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो व्यापारिक जहाजों का यह मार्ग पूरी तरह बंद हो सकता है।

जहाज पर काम करने वाले नाविकों के परिवारों के लिए यह दौर किसी डरावने सपने जैसा है। रोजगार की तलाश में समंदर पार जाने वाले आम लोग इस भू-राजनीतिक खेल में अपनी जान गंवाने को मजबूर हैं। सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को अब कागजी बयानों से आगे बढ़कर ठोस समुद्री सुरक्षा का खाका खींचना होगा, वरना आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार में मंहगाई का ऐसा तूफान आएगा जिसे संभालना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा।

JW

Julian Watson

Julian Watson is an award-winning writer whose work has appeared in leading publications. Specializes in data-driven journalism and investigative reporting.